Friday, June 5, 2009

चलो चाँद नापते है

चलो चाँद नापते हैं
तुम ज़रा सूरज वाली और चलना
मैं ज़मीन की तरफ का सिरा पकड़ती हूँ
देखो आँखें ना भींच लेना रास्ते में
बहुत रोशनी है आगे
ज़रा सा रास्ता भूले तो किसी उल्का में फँस जाओगे
फिर मुझे सिरा पकड़ के उल्टा चलना पड़ेगा
कितना अच्छा हो ना कि उस वक़्त
तुम पीछे से आके मुझे चौंका दो!
मैं सैय्यार की ज़मीन पे गिरते गिरते बचूँ
और तुम मुझे थाम के
चाँद कि ज़मीन पे बिठा दो
और फिर धुआँ हो जाए हर नाप-ओ-सिरा
कोई डोर ना बचे दरमियाँ……
और फिर चाँद नापे
दूरियाँ हमारे बीच की
मगर सिरा ना ढूँढ पाए
कुछ ऐसे भी एक बार मोहब्बत करते हैं
चलो चाँद नापते हैं

7 comments:

Pradeep Kumar said...

मैं सैय्यार की ज़मीन पे गिरते गिरते बचूँ
और तुम मुझे थाम के
चाँद कि ज़मीन पे बिठा दो
और फिर धुआँ हो जाए हर नाप-ओ-सिरा
कोई डोर ना बचे दरमियाँ……
और फिर चाँद नापे
दूरियाँ हमारे बीच की
मगर सिरा ना ढूँढ पाए
कुछ ऐसे भी एक बार मोहब्बत करते हैं
चलो चाँद नापते हैं

bahut khoob ! bas itna hi kahta hoon .
jahaan na panhuche ravi wahaan pahunche kavi.
kaash aisi mohabbat sab karne lagen !!

नवनीत नीरव said...

bahut hi khoobsoorat rachna hai.Bahut pasand aayi.

Unknown said...

adbhut kavita....
adbhut bole toh ekdam jhakaas !!!!

गिरिजेश राव, Girijesh Rao said...

वाह क्या कहने!

बस इतना अंत में जोड़ दें।

'फलक पर पसरी आकाशगंगा की डोर से'

word verification हटा दें। अति कष्टकारी होता है। लगता है कि शुभेच्छा का भी प्रमाण माँगा जा रहा है।

प्रकाश गोविंद said...

क्या नाजुक कविता है
क्या भावनाएं हैं
क्या अनोखी कल्पना है

आज की आवाज


कृपया वर्ड वैरिफिकेशन की उबाऊ प्रक्रिया हटा दें ! इसकी वजह से प्रतिक्रिया देने में अनावश्यक परेशानी होती है !

तरीका :-
डेशबोर्ड > सेटिंग > कमेंट्स > शो वर्ड वैरिफिकेशन फार कमेंट्स > सेलेक्ट नो > सेव सेटिंग्स

गोविंद गोयल, श्रीगंगानगर said...

chand ko napate huye hame bhee sath le lo. narayan narayan

hindi-nikash.blogspot.com said...

आज आपका ब्लॉग देखा.... बहुत अच्छा लगा. मेरी कामना है कि आपके शब्दों को नये अर्थ, नयी ऊंचाइयां एयर नयी ऊर्जा मिले जिससे वे जन-सरोकारों की सशक्त अभिव्यक्ति का सार्थक माध्यम बन सकें.
कभी समय निकाल कर मेरे ब्लॉग पर पधारें-
http://www.hindi-nikash.blogspot.com

सादर-
आनंदकृष्ण, जबलपुर