Wednesday, September 2, 2009

रिम झिम

रिम झिम रिम झिम बरसे बददल ,
वाहवान वी ठंड्दियाँ चलियाँ
तू ना आया बेदर्दा वे
मिट्टियाँ वी बह चलियाँ


बददल घिरे ने काले काले,
दिसदा नियो अम्बर
जुल्मी आवे ते रंग वी दिखन
जल गई मैं चूल्याँ दे बाले

डालियाँ झूक दियां बोझ दे मारे
टिप टिप अश्रु भान्दियाँ
मोह दी मारी रो न सकी मैं
आन्द्रा मेरा उडारिया मारे

किंवे गुजरे सावन पेढा
खिल खिल वाजां मारे
बैठी देउडी मेंदी लाके
नैन वरांडे गाडे

यार आवे ते नचके गाके
मी वसदे ते फूल खिलाके
बिचली चमके शोर मचाके
सत रंगादी वेळ सजावा


रिम झिम रिम झिम बरसे बददल,
वाहवा वी ठंड्दियाँ चलियाँ

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